Vidyapati|Maithil Kokil|Mithila
बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे। छोड़इत निकट नयन बह नीरे।। करनोरि बिलमओ बिमल तरंगे। पुनि दरसन होए पुनमति गंगे।। एक अपराध घमब मोर जानी। परमल माए पाए तुम पानी।। कि करब जप-तप जोग-धेआने। जनम कृतारथ एकहि सनाने।। भनई विद्यापति समदजों तोही। अन्तकाल जनु बिसरह मोही।। (function() { var jaxlChat = document.createElement(“script”); jaxlChat.type = “text/javascript”; jaxlChat.async [...]
